एक तारा जो अंतरिक्ष में कहीं दूर खो गया था ।
रात का समय था । चारों तरफ काली घटा पसरी हुई थी । मानो यह सब कुछ अपने अंदर समाने को आतुर हो और कोई इसे ऐसा करने से नहीं रोक सकता । सब जगह बस सन्नाटा ही सन्नाटा था । सभी घरो की बत्तियां बुझी हुई थी । सड़क पर एक लाइट चालू थी पर वो भी झप-झप(बंद- चालू) कर रही थी मानो वह भी काली घटा के आगे बेबस थी । यह पूरे गाँव में एकमात्र लाइट थी जो रात के समय काम करती थी । बाकी सारे गाँव में सड़कों की लाइटें खराब थी । एक व्यक्ति अपने घर के बाहर चारपाईं डाल कर खुले आसमान के तले सोया हुआ था जिनका कद लम्बा और शरीर भारी-भरकम था जिसे देखने पर उनकी उम्र पच्चीस वर्ष के आस-पास लग रही थी लेकिन हकीकत में उनकी उम्र चालीस वर्ष थी । वह थे गांव के छज्जू पहलवान । वह रोजाना सुबह चार बजे से कसरत चालू करते थे और फिर कसरत पूरी हो जाने के बाद पच्चीस भैंसों को अकेले नहलाते थे इसके बाद वे अपने पशुओं को चारा डालते और फिर गांव के अपने शिष्यों को दांव-पेंच की शिक्षा देते थे। वे स्वभाव से थोड़े गुस्से वाले थे लेकिन दिल से सच्चे और अच्छे व्यक्ति थे । गांव के सभी लोग उनकी बहुत इज्जत करते थे लेकिन उनके गुस्से से भी डरते थे । गांव वालों को यही डर लगा रहता था की कहीं वे उनकी किसी बात का बुरा ना मान जाए और उनको छज्जू पहलवान का गुस्सा न सहना पड़ जाए । रोजाना की तरह आज भी छज्जू पहलवान अपनी दिनचर्या पूरी करके रात को अपने घर के अंदर सो रहे थे लेकिन गर्मी की वजह से उनको घर में नींद नहीं आ रही थी इसलिए वे घर के बाहर चारपाई डालकर सो रहे थे । आसमान एकदम साफ और खुला हुआ था जिसमें चांद और तारे टिमटिमा रहे थे और यह दृश्य उनके मन को खूब भा रहा था । वह बिना पलकें झपकाए एकटक आसमान की ओर ही देख रहे थे फिर उनको एक तारा दिखा जो बाकी तारों के समूह से अलग-थलग कहीं दूर अंतरिक्ष में अकेला था । वह सोच रहे थे कि यह तारा सब तारों के समूह से दूर और अकेला क्योंं है? वे चाहते थे की यह तारा भी बाकी तारों के साथ एक समूह में आ जाए जिससेे यह आसमान और भी सुंदर लगे । वह इस दृश्य को देख ही रहे थे कि अचानक देखते-ही-देखते आसमान मेंं काली घटा छा गई और पूरे आसमान को अपने अंदर समा लिया । यह देखकर उनको बहुत गुस्सा आया वो उस काली घटा को नष्ट कर देना चाहते थे लेकिन प्रकृति के आगे वह कुछ नहीं कर सकते थे वह अपने आप को भी उस तारे की तरह ही कमजोर और असहाय महसूस कर रहे थे जो ना चाहते हुए भी अपने समूह से दूर कहीं अकेला था और इसीलिए वह चाहते थे कि जैसे पक्षी मुसीबत आने पर उड़कर किसी सुरक्षित जगह पर जा सकते हैं वैसे ही काश ! आसमान के भी पंख होते तो वह भी इस काली घटा से दूर कहीं सुरक्षित जगह पर उड़कर जा सकता जहां वह बिना किसी अवरोध के अपनी सुंदरता बिखेर सकता ।
॥ जानिए पार्ट 2 में क्या होता है क्या आसमान उस काली घटा से मुक्त हो पता है या नहीं ॥
लेखक :- संगीत कुमार